03 March 2015

जिम्मेदार कौन

ज्योती सिंग पांडे के बलात्कार के केस में दोषी पाये गए एक अपराधी का BBC द्वारा इंटरव्यू लिया गया है। इसं इंटरव्ह्यू को जागतिक महिना दिन के अवसर पर ८ मार्च को प्रसारित जाएगा। इंटरव्ह्यू में अपराधी अपने समर्थन में कहता है कि "देर तक घर से बाहर रहने वाली औरतों ने बलात्कार के लिए खुद को जिम्मेदार समझना चाहिए।"

कितना आसान होता है ना, ऐसी घिनौनी हरकत के लिए औरत को जिम्मेदार बताना? वैसे भी दुनिया के किसी भी कोने में, कभी किसी बलात्कारी ने अपने आप को बलात्कार की जिम्मेदारी लेते हुए देखा है हमने? हर वो इन्सान जो औरत पर इस तरह का हमला करता है, वह हमेशा औरत को ही सारी परिस्थिति का जिम्मेदार बताता है।


अब बात जब जिम्मेदारी की निकल ही गई है तो मै बता दूं, हममेंसे कितने लोग जानते है कि हमारे देश में जितने बलात्कार कम कपडे पहनने वाली लडकियोंपर नही हुए उतने कपडों से ढकी हुई औरतों पर हुए है। पुरी दुनिया में हमारा देश बलात्कार में तीसरे और खून के मामले में दूसरे स्थान पर है। इतनी तादात में देशभर में बलत्कार होते है तो जाहीर है, हर दूसरी औरत कम कपडों में घूमती होगी। लेकिन क्या सचमुच ऐसा है?

अगर बलात्कार का शिकार सिर्फ कम कपडे पहनने वाली औरते होती, तो क्यों हम समाचार पत्र में ऐसे भी समाचार पढते जिनमें औरत पर बलात्कार करने वाला उसका अपना पिता, चाचा, देवर, भाई या दादा था?

अगर बलात्कार का शिकार सिर्फ कम कपडे पहनने वाली औरते होती, तो क्यों पिडीता की उम्र दो साल की बच्ची से लेकर ७५ साल वाली दादी मॉं तक कुछ भी होने लगी है।

यह सच्चाई है, अक्सर ऐसी घटनाएं समाचार पत्र में भी छपकर आती है लेकिन इस सच्चाई को नजरअंदाज कर लोग औरत के कपडे की लंबाई नापने में और उसके घर के बाहर रहने के समय को देखने में लगे हुए है। दुनिया के हर एक देश में आज तक ना जाने कितने ही बलात्कार के वाकियात्‌ हुए है लेकिन परिस्थिती मे कोई बदलाव आने के बजाय लोग, इन लोगोंमे कुछ महिलाएं भी शामिल है, औरतों के रहन-सहन, कपडे और घूमने फिरने के समय को लेकर चर्चा कर रही है।

जब ऐसी चर्चाएं होती है, तो जो लोग औरत को जिम्मेदार नही मानते, उनका खून खौलता है, देशभर से करीब एक-दो हफ्ते तक प्रतिक्रियाओं का जोर रहता है और उसके बाद फिर क्या? हम फिर कुछ नए बलात्कार के समाचार पढने के लिए तैयार हो जाते है। लेकिन हालात बदलने के लिए हमने कोई कदम उठाएं है? मोमबत्ती जलाने के अलावा हमने खुद अपनी सुरक्षा के लिए कुछ किया है? टि.व्ही चैनल पर बेवजह की बहस करने के बदले कभी अपने घर के बडे से लेकर छोटे मर्द को यह बताना मुनासीब समझा है कि औरत को एक इन्सान समझो?

सिर्फ हमारे देश की नही बल्कि पूरे दुनिया में किसी भी देश की न्यायव्यवस्था अब तक इस दुविधा में है कि बलात्कारी को उम्र कैद की सजा सुनाएं या मौत की? किसी ने भी बलात्कार की शिकार हुई औरत से यह पूछा कि वह क्या चाहती है?

एक बार पूछ कर देखिए, आप के पैरों तले की जमीन खिसक जाएगी।

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